मजहब के नही अब मतलब हो गए है महाग्रंथ
इंसानियत टुकड़े हो रहे है, बन रहे अनेक पंथ
अपने मतलब से सब लिख रहे है गीता,
कोई अब किसी के लिए नही जीता
अपने मतलब से सब लिख रहे है कुरान
पाक काम छोड़ नापाक हो रहे इंसान
अपने मतलब से सब लिख रहे है बाइबल
मानव धर्म छोड़, धर्म परिवर्तन पर है बल
अपने देश को महान बनाने की है अब ललकार
भगवा, नीला हरे रंग की लडाई से मचा है हाहाकार
चंद वादों और मीठी बातो का है ये ढकोसला
दीमक से खतरनाक है ये, कर रहे देश खोकला
चुनाव से पहले किसी को किसी से नही होता द्वेष
मौका मिलते ही गिरगिट को पीछे छोड़ने का इनका भेष
गार्डन, सफर, होटल, आफिस में साथ रहने की हमे आदत है
मानवता है धर्म हमारा, यही हमारी इबादत है
नही टूटने देंगे इस देश को धर्म की लड़ाई में
सभी का जीवन सुंदर हैं, मानवता की भलाई में
गीता, कुरान बाइबल छोड़ आओ मानवता की लिखे किताब
न कोई रंग हो ना कोई नियम, बस प्रेम हो बेहिसाब
Too good..n reality of life ... This is what happening in the world
ReplyDeleteGood drb... good going.
ReplyDeleteThe face of culture developed by politicians in our nation.