Thursday, April 4, 2019

इंसानियत की किताब

मजहब के नही अब मतलब हो गए है महाग्रंथ
इंसानियत टुकड़े हो रहे है, बन रहे अनेक पंथ

अपने मतलब से सब लिख रहे है गीता,
कोई अब किसी के लिए नही जीता

अपने मतलब से सब लिख रहे है कुरान
पाक काम छोड़ नापाक हो रहे इंसान

अपने मतलब से सब लिख रहे है बाइबल
मानव धर्म छोड़, धर्म परिवर्तन पर है बल

अपने देश को महान बनाने की है अब ललकार
भगवा, नीला हरे रंग की लडाई से मचा है हाहाकार

चंद वादों और मीठी बातो का है ये ढकोसला
दीमक से खतरनाक है ये, कर रहे देश खोकला

चुनाव से पहले किसी को किसी से नही होता द्वेष
मौका मिलते ही गिरगिट को पीछे छोड़ने का इनका भेष

गार्डन, सफर, होटल, आफिस में साथ रहने की हमे आदत है
मानवता है धर्म हमारा, यही हमारी इबादत है

नही टूटने देंगे इस देश को  धर्म की लड़ाई में
सभी का जीवन सुंदर हैं, मानवता की भलाई में

गीता, कुरान बाइबल छोड़ आओ मानवता की लिखे किताब
न कोई रंग हो ना कोई नियम, बस प्रेम हो बेहिसाब

2 comments:

  1. Too good..n reality of life ... This is what happening in the world

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  2. Good drb... good going.

    The face of culture developed by politicians in our nation.

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