नतमस्तक, शीश झुका कर आपको नमन
नम आंखों से नीर की वो अविरल धारा
अब आपकी याद में यही रहेगी एक सहारा
मानो उजड़ गया हो, वो एक हराभरा चमन
नतमस्तक, शीश झुका कर आपको नमन
मुश्किल शब्द न रोक सका कभी उनकी राह
चट्टानों से मजबूत थी उनकी हरदम उनकी चाह
हर राह में आई मुश्किलों का आपने किया दमन
नतमस्तक, शीश झुका कर आपको नमन